वरलक्ष्मी पूजा,थोरा पूजा,वायाना दानं

दसांगम गुग्गुलोपेतम सुगंदंचा मनोहरं
धूपं दास्यामि देवेसी गृहण कमला प्रिये
श्री वरलक्ष्मी धुपमाग्रपयामी.

घ्रुतावार्थी समयुक्त्हम अंधकारा विनासकम
दीपं दास्यामिठे देवी गृहाण मुधिताभावा
श्री वरलाक्स्मी दीपं दर्सयामी

नैवेद्यं सद्रसोपेथं धधि मद्वाद्ज्य संयुतम
नाना भक्स्य फलोपेतम गृहाण हरी वल्लभे
श्री वारा लक्ष्मी नैवेद्यं समर्पयामी

फुगी पहला समायुक्तं नागवल्ली दलैर्युतम
कर्पुर चूर्ण सम्युक्थं थाम्बुलम प्राथी गृह्यताम
सृवाराल्क्ष्मी ताम्बूलं समर्पयामी

नीराजनं समानेतम कर्पूरेना समन्विथं
ठुभ्यम धस्यामहम देवी गृह्यताम विष्णु वल्लभे
श्री वरलक्ष्मी नीराजनं समर्पयामी

पद्मासने पद्मा करे सर्व लोक्यका पूजिते
नारायणा प्रिये देवी सुप्रिथा भाव सर्वदा
श्री वरलक्ष्मी मंत्र पुष्पं समर्पयामी

यानिकानिचापपानी जन्मंतारा कृतानिचा
तानितानी प्रनास्यंथी प्रदस्क्शिना पधेपधे
पपोहम पापा कर्महम पापात्मा पपसंभावा
त्राहिमाम कृपया देवी सरनागता वत्सले
अन्यदा सरनाम नस्तित्वामेवा सरनाम मामा
तस्माथ कारुन्य भावेन रक्षा रक्षा जनार्धानी
श्री वरलाख्मी प्रदाक्षिना नमस्कारम समर्पयामी

समस्त लोक जननी नाम्स्ठे विष्णु वल्लभे
पाहिमाम बकता वरधेय वरलक्ष्मी देवी नामोनामाहा
श्री वरलाक्स्मी नमस्कराम समर्पयामी

थोरापूजा:
1. कमालायेनामः, प्रधामा ग्रंधिम पूजयामि
2. रामायेनामाहा, द्वितीय ग्रंधिम पूजयामि
3. लोकामाथ्रेनामाहा, थ्रुथिया ग्रंधिम पूजयामि
4. विस्वजनानिनामाहा, चतुद्र्हा ग्रंधिम पूजयामि
5. वरलाक्ष्मिनामाहा, पंचम ग्रंधिम पूजयामि
6. क्शीराब्दितानायानामाहा षष्ट ग्रंधिम पूजयामि
7. विस्वसक्शिन्यिनामाहा, सप्थामा ग्रंधिम पूजयामि
8. चन्द्रसोदारियिनामाहा, अश्तामा ग्रंधिम पूजयामि
9. वरलाक्ष्मिनामाहा नवम ग्रंधिम पूजयामि बध्नामि दक्शिनेहस्ठे नवसूत्रम सुभाप्रदम पुत्रपौत्रभिवृद्धिम्चा सौभाग्यं देहिमेरामाए

वायाना दानं :
एवं संपूज्य कल्यानीम वरलाक्ष्मीम स्वसक्तिः,
दाथाव्यम द्वादासापुपम वयानं हिद्विजाथा यी
इन्दिराप्रथिग्रुह्नातु इन्दिरावैदाथिचा इन्दिराथाराकोबभ्यम इन्धिरायाई नामोनामाहा